कैसी हो तुम

जबसे जाना जितना जाना,
बुन रहा बस उसका ताना बाना
नाम सी स्वर्णिम,कर्म स्वरूपा
अंखियां जीवन ज्योत जगाई
अधरों पर मुस्कान समाई।

सहमी सी

डरी हुई सहमी सीप्यारी सी भोली सीदेखती चिहुँक कर चहुओर धड़कन बढ़ी सांसे अटकीलगाए आस पुरजोरएक…

समझ

समझ कर भी नासमझी का फ़साना क्यूँ।अपने सी लगती फिर भी बेगाना क्यूँ।नासमझी का यूँ…

सौंदर्य

जादूगरी प्रशाधनो कीउचित अनुचित संसाधनों कीकुछ सुंदर बिंदिया सजानापायल की छम छम बजानाफॉसिल की घड़ियां…

पगली

उस पगली की बातों में खोना।उसका पास होकर भी न होना।ख्याब उसके हरपल सँजोना।उसकी आगोश…