शरलॉक होम्स की जासूसी 4

विशाल उत्तरी अमरीकी महाद्वीप के बीच के हिस्से में एक बंजर और घिनौना रेगिस्तान है, जो कई सालों तक सभ्यता की तरक्की में बाधा बना रहा. सियरा निवाडे से नेब्रास्का तक और उत्तर येलोस्टोन नदी से ले कर दक्षिण में कोलाराडो तक पूरा इलाका उदासी और निस्तब्धता से भरा है. इस मनहूस से इलाके में कुदरत भी हमेशा एक रूप में नहीं रहती. यहां पर बर्फ से ढके विशाल पर्वत भी हैं और अंधेरी, उदास वादियां भी. यहां रफ्तार से बहती नदियां हैं जो टेढ़ेमेढ़े पहाड़ी दर्रों से हो कर गुजरती हैं. यहां विशाल मैदान हैं, जो सरदी में बर्फ से सफेद रहते हैं और गरमी में क्षारयुक्त, ऊसर धूल से मटमैले. पर ये सभी बंजर, न रहने योग्य और दुख से भरपूर होने के कारण एकसमान भी हैं.

हताशा के इस इलाके में कोई भी निवासी नहीं है. कभीकभार दूसरी जगह जाने के लिए पौनी या ब्लैक फुट कबीलों के जत्थे गुजरते हैं, दूसरी जगह जाने के लिए जहां शिकार आसानी से मिल जाते हैं, पर बहादुर से बहादुर भी इन मैदानों को पार कर के घास के मैदानों में अपने को पाने पर राहत की सांस लेता है. झाड़ियों में कोयोट (भेड़िया) छिपे रहते हैं, बाज भारी शरीर से हवा में उड़ता है और भूरे बालों वाला भालू अंधेरी पहाड़ी नदियों में भद्दे तरीके से चलता हुआ चट्टानों के बीच से खाना ढूंढ़ता है. इस बियाबान में यही निवासी हैं.

पूरे संसार में सियरा ब्लैंको के उत्तरी ढलान से ज्यादामलिन कोई दूसरा नजारा नहीं है. जहां तक नजर जाती है, यह चपटा मैदान ही दिखाई देता है, जिस के बीच बीच में क्षार के धब्बे हैं और बौनी चप्पराल झाड़ियों के गुच्छे. क्षितिज के दूसरी ओर पर्वत चोटियों की बर्फ से ढकी हुई लंबी श्रृंखला है, इस विशाल विस्तार में जीवन का कोई चिन्ह नहीं है, न जीवन से संबंधित किसी भी चीज का नामोनिशान है. नीले आकाश में कोई चिड़िया नहीं है. मटमैली धरती पर कोई हरकत नहीं है–चाहे कोई कितना भी सुनने का प्रयत्न करे, यहां बिलकुल सन्नाटा है, इस विशाल बियाबान में आवाज की परछाईं तक नहीं है; सन्नाटे के सिवा कुछ नहीं, संपूर्ण रूप से दिल डुबोने वाला सन्नाटा.

यह कहा गया है–इस विस्तार में जीवन से संबंधित कुछ भी है, पर यह बात नहीं है. सियरा ब्लैंको से नीचे देखने पर रेगिस्तान में एक पगडंडी दिखाई देती है. जो दूर जा कर कहीं खो जाती है. उस में पहियों के निशान हैं और कई साहसियों के पैरों के निशान भी हैं. इधरउधर कुछ सफेद सी चीजें पड़ी दिखाई देती हैं, जो धूप में चमकती हैं और मटमैली धूल में अलग दिखाई पड़ती हैं. उन के पास जा कर गौर से देखो, ये हड्डियां हैं: कुछ बड़ी और खुरदुरी, कुछ छोटी और नाजुक. पहली वाली हड्डियां बैलों की हैं और दूसरे तरह की हड्डियां इनसानों की. डेढ़ हजार मीलों (2,400 कि. मी.) तक इस बदनसीब कारवां का रास्ता इन्हीं छितरे अवशेषों से मालूम किया जा सकता है, जो रास्ते में घिरते गए हैं.

4 मई, 1847 को, यह दृश्य देखता एक अकेला यात्री खड़ा था. उस का स्वरूप ऐसा था, मानो वह उस इलाके का जिन्न या दानव हो. कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता था कि वह चालीस वर्षों का है या साठ का. उस का चेहरा पतला और कुम्हलाया हुआ था और उस की भूरी, झुलसी हुई खाल उस की उभरी हड्डियों पर खिंची हुई थी. उस के लंबे, भूरे बाल और दाढ़ी में सफेदी झलक रही थी; उस की आंखें धंसी हुई थीं और उन में अस्वाभाविक चमक थी. उस के एक हाथ में राइफल थी. उस के हाथों में किसी ढांचे से ज्यादा चरबी नहीं थी. खड़ेखड़े उस ने सहारे के लिए अपने राइफल की टेक लगाई, पर फिर भी उस का लंबा चौड़ा डीलडौल इशारा कर रहा था कि कभी वह बड़ा फुरतीला रहा होगा, पर उस का पतला चेहरा और उस के कपड़े जो उस के शरीर पर झूल रहे थे, उसे इतना बूढ़ा दिखा रहे थे कि लग रहा था कि वह आदमी भूख और प्यास से मरने वाला है.

वह बहुत कष्ट उठा कर पहाड़ी दर्रे के नीचे उतर कर पानी ढूंढ़ने का असफल प्रयास करने लगा, अब पूरा क्षारीय मैदान उस की आंखों के सामने फैला हुआ था. सामने की क्रूर पर्वत श्रृंखला पर कोई पेड़ या पौधा नजर नहीं आ रहा था, जिस से पास में कहीं पानी का आभास हो. दूरदूर तक कहीं भी उम्मीद की किरण नहीं दिखाई दे रही थी. उस ने बदहवास नजरों से उत्तर, पूरब और पश्चिम की ओर नजर दौड़ाई. फिर उसे महसूस हुआ किउस की यात्रा का अंत हो गया है और वह उस बंजर दर्रे में मरने वाला है. “बीस साल बाद मुलायम बिस्तर पर मरना ही है, तो आज यहीं क्यों नहीं,” एक चट्टान की छाया में बैठते हुए वह बुदबुदाया.

बैठने से पहले उस ने अपनी बेकार राइफल जमीन पर रखी और एक सलेटी रंग के शौल में लिपटी एक बड़ी सी गठरी भी, जो उस के दाएं कंधे पर लटकी थी. उस की ताकत के हिसाब से वह बहुत भारी थी, क्योंकि उस को नीचे रखने पर वह बहुत तेजी से जमीन पर गिरी. तत्काल ही उस सलेटी गठरी में से रोने की आवाज आई और इस में से एक नन्हा सा डरा हुआ चेहरा निकला जिस की आंखें भूरी और चमकीली थीं और फिर दो छोटीछोटी मुट्ठियां भी निकलीं.

“तुम ने मुझे चोट पहुंचाई है?” एक बच्चे की आवाज ने शिकायत भरी आवाज में कहा.

“क्या मुझ से ऐसा हो गया,” आदमी ने क्षमा मांगते हुए कहा. “मैं ने जानबूझ कर नहीं किया था.” बोलतेबोलते उस ने सलेटी शौल खोली और उस में से एक बच्ची बाहर आई, जो करीब पांच वर्ष की रही होगी. उस के प्यारे से जूते और सुंदर गुलाबी फ्रॉक दिखा रहे थे कि उस की मां ने उसे कितने प्यार से तैयार किया होगा. बच्ची पीली और कुम्हलाई थी, पर उस के हाथ और पैर स्वस्थ दिखाई दे रहे थे. लग रहा था कि उस ने अपने साथी से कम कष्ट झेले हैं.

“अब कैसी हो?” उस ने चिंता से पूछा, क्योंकि अबभी वह अपने सिर के पीछे सुनहरे बालों को रगड़ रही थी.

“इस को चूम कर ठीक कर दो,” उस ने गंभीरता से अपनी चोट दिखाते हुए उस से कहा. “मां ऐसा ही करती थी. मां कहां है?”

“मां चली गई. शायद तुम भी जल्दी ही उस के पास चली जाओगी.”

“गई, ओह!” बच्ची बोली. “अजीब है कि उस ने मुझ से गुडबाय भी नहीं कहा. जब वह चाय के लिए आंटियों के यहां जाती थी, तो मुझे हमेशा गुडबाय करती थी और अब तो उसे गए तीन दिन हो चुके हैं. यहां तो बड़ा सूखा है, है न? क्या पानी या कुछ खाने के लिए नहीं है?”

“नहीं, यहां कुछ भी नहीं है, डियर! तुम थोड़ी देर के लिए सब्र करो, फिर तुम ठीक हो जाओगी. अपना सिर इस तरह मुझ पर टिका लो और फिर तुम्हें बेहतर लगेगा. इस समय बोलना आसान नहीं है क्योंकि हमारे होंठ चमड़े जैसे हो रहे हैं, पर ठीक यही होगा कि मैं तुम्हें सारी बात बताऊं. यह तुम्हारे पास क्या है?”

“सुंदर सुंदर चीजें!” उत्साह से उस बच्ची ने कहा और अबरक के दो चमकते टुकड़े उठा कर दिखाए हम जब वापस घर जाएंगे तो मैं अपने भाई बॉब को दिखाऊंगी.”

“तुम जल्दी ही इन से भी सुंदर चीजें देखोगी,” आदमी ने विश्वास से कहा, “तुम बस थोड़ी देर रुक जाओ. हालांकि मैं तुम्हें बताने वाला था, तुम को याद हैजब हम नदी से चले थे?”

“ओह, हां.”

“देखो, तब हम ने अंदाज लगाया था कि हमें जल्दी ही दूसरी नदी मिल जाएगी. पर कुछ गड़बड़ हो गई थी. हमारे कंपास या नक्शे में या कहीं और, नदी नहीं मिली. पानी खत्म हो गया, बस एकाध बूंद तुम जैसों के लिए और, और…”

“और तुम नहा नहीं पाए,” उस की मित्र ने उस के गंदे शरीर को देखते हुए गंभीरता से टोका.

“नहीं, और न ही पीने को कुछ मिला. और मिस्टर बेंडर, जाने वालों में सब से पहले वही था. फिर इंडियन पीट और फिर मिसेज मैकग्रेगोर. फिर जॉनो होंस और फिर बिटिया, तुम्हारी मां.”

“तो मरने वालों में मां भी शामिल है,” बच्ची बोल उठी, अपनी फ्रॉक में मुंह छुपा कर बुरी तरह रोने लगी.

“हां, वे सब चले गए, मेरे और तुम्हारे अलावा. फिर मैं ने सोचा कि इस ओर पानी की कुछ उम्मीद हो सकती है, इसलिए मैं ने तुम को अपने कंधे पर उठाया और हम दोनों साथसाथ यहां तक आए. पर ऐसा नहीं लग रहा है कि हालात सुधरेंगे. अब तो हमारे पास छोटी सी भी उम्मीद नहीं है!”

“क्या आप का मतलब है कि हम भी मरने वाले हैं?” बच्ची ने अपनी सिसकियां दबाईं और आंसू भरा चेहरा उठा कर पूछा.

“मेरे खयाल से ऐसा ही है.”

“आप ने पहले ऐसा क्यों नहीं कहा?” खुशी से हंसते हुए उस ने पूछा. “आप ने मुझे कितना डरा दिया था. अब जब हम मरेंगे, तो हम फिर से मां के साथ होंगे.”

“हां, तुम मां के पास होगी, बेटी.”

“और आप भी. मैं उन को बताऊंगी कि आप कितने अच्छे हैं. मुझे पक्का मालूम है कि वह स्वर्ग के दरवाजे पर पानी का घड़ा और गेहूं की ढेर सारी गरम और दोनों और सेंकी हुई चपातियां लिए खड़ी होगी, जो बॉब और मुझे अच्छी लगती हैं.”

“मुझे नहीं मालूम, ज्यादा समय नहीं लगेगा.” आदमी की आंखें उत्तर की ओर के क्षितिज पर टिकी थीं. आसमान के नीले मंडल में तीन छोटे बिंदु नजर आए थे, जो हर पल बढ़ते जा रहे थे और तेजी से पास आते प्रतीत हो रहे थे. जल्दी ही वे तीन बिंदु तीन बड़ी भूरी चिड़ियों में बदल गए, जो इन दो यात्रियों के सिरों के ऊपर मंडराने लगीं और फिर ऊपर के कुछ चट्टानों पर बैठ गईं. ये थीं बजर्ड, यानी पश्चिम के गिद्ध, जिन का प्रकट होना मौत का सूचक है.

“मुरगे और मुरगियां,” उन के मृत्यु सूचक आकार को देख कर बच्ची खुशी से चिल्ला पड़ी और तालियां बजा कर उन को उठाने की कोशिश करने लगी. “कहो, क्या भगवान ने यह जगह बनाई है?”

“हां, बनाई तो है.” उस के साथी ने इस अप्रत्याशित सवाल पर चौंकते हुए कहा.

“भगवान ने इलिनोयस बनाया और उस ने मिसूरी भीबनाई,” लड़की आगे बोली, “मुझे लगता है कि यह जगह किसी और ने बनाई है. यह जगह उन जगहों की तरह सुंदर नहीं है. यहां पर वे लोग पानी और पेड़ बनाना भूल गए हैं.”

“तुम प्रार्थना क्यों नहीं कर रही?” आदमी ने झिझक से पूछा.

“अभी रात नहीं हुई है,” उस ने जवाब दिया.

“इस से कोई फर्क नहीं पड़ता. ऐसा आमतौर पर नहीं होता, पर ईश्वर इस का बुरा नहीं मानेगा. तुम अपनी वही प्रार्थनाएं करो जो तुम हर रात अपने वैगन में करती थी, जब हम मैदान में थे.”

“तुम खुद थोड़ी प्रार्थना क्यों नहीं करते?” बच्ची ने अचरज भरी नजरों से पूछा.

“मैं उन को भूल गया हूं,” उस ने जवाब दिया, “मैं ने तब से पूजा नहीं की है जब से मैं इस राइफल के आधे नाप का था. पर मुझे लगता है कि किसी भी काम के लिए कभी भी ‘बहुत देर हो गई’ नहीं समझना चाहिए. तुम अपनी प्रार्थनाएं गाओ और मैं यहां खड़ा हो कर तुम्हारे पीछेपीछे दोहराता रहूंगा.”

“फिर तो तुम्हें घुटनों के बल बैठना होगा, और मुझे भी,” वह इस काम के लिए अपना शौल बिछाते हुए बोली, “तुम को अपने हाथ इस तरह उठाने हैं. इस से तुम को अच्छा महसूस होगा.”

बड़ा विचित्र नजारा था, परंतु वहां गिद्धों के अलावा और कोई भी देखने वाला नहीं था. पतली सी शौल परदोनों यात्री बैठे थे. छोटी सी बातूनी बच्ची बेपरवाह, कठोर और साहसी. उस का गोलमटोल चेहरा और उस के कठोर, पतले नाकनक्श, बादलरहित आसमान की ओर उठे, दिल से फरियाद कर रहे थे. उस भगवान से जिस से सभी प्राणी डरते हैं, जबकि दोनों आवाजें–एक पतली और स्पष्ट, दूसरी भारी और कठोर, मिल कर दया और माफी की भीख मांग रही थीं. प्रार्थना खत्म हुई और वे वापस चट्टान की छाया में जा कर बैठ गए.

फिर बच्ची अपने रक्षक के सीने पर सिर रख कर सो गई. थोड़ी देर वह उसे सोता हुआ देखता रहा, पर प्रकृति उस से अधिक बलवान थी. तीन दिन और तीन रातों तक वह न सोया और न आराम किया. धीरेधीरे उस की पलकें उस की थकी हुई आंखों पर मुंद गईं और सिर धीरेधीरे सीने पर झुकता गया और आदमी की सफेद काली दाढ़ी बच्ची की सुनहरी लटों से मिल गईं और दोनों एक समान गहरी और स्वप्नरहित नींद सोते रहे.

यदि यात्री आधे घंटे तक और जगा रहता, तो उस की आंखों को एक अजीब नजारा देखने को मिलता. क्षारीय मैदान के अंतिम छोर पर हलकी सी धूल उड़ी, जो पहले इतनी हलकी थी कि दूर का कोहरा लग रही थी, पर धीरेधीरे यह धूल ऊंची और चौड़ी होती गई और एक ठोस, स्पष्ट बादल बन गई. यह बादल आकार में बढ़ता गया और फिर यह साफ हो गया कि यह गुबार बहुत सारे प्राणियों के एक साथ चलने से उठा है.

अन्य किसी उपजाऊ जगह में देखने वाले को लगताजंगली भैंसों का विशाल झुंड घास के मैदानों में चरने आ रहा है, पर इस बंजर रेगिस्तान में इस की संभावना बिलकुल नहीं थी. जैसेजैसे वह धूल का गुबार उस चट्टान तक आ पहुंचा, जहां वे दोनों सो रहे थे, तो धूल में से कैनवस ढकी गाड़ियां और सशस्त्र घुड़सवार दिखाई पड़ने लगे और फिर पता चला कि यह पश्चिम की ओर जाता हुआ कोई विशाल कारवां है. पर क्या कारवां था! जब उस का एक सिरा पहाड़ की तलहटी पर पहुंच गया, तो भी दूसरा सिरा क्षितिज में दिखाई तक नहीं पड़ रहा था. उस विशाल मैदान में गाड़ियां, घुड़सवार और पैदल लोग धीरेधीरे चले आ रहे थे. बहुत सी औरतें अपनेअपने बोझों को संभालती लड़खड़ाती आ रही थीं और बच्चे उन गाड़ियों के साथसाथ या तो पैदल दौड़ रहे थे या सफेद परदों में से झांक रहे थे. यह इस देश से दूसरे देश तक जाने वाले कोई साधारण लोग नहीं थे.

ये कोई खानाबदोश थे जो परिस्थितियों की मार खा कर किसी नई जगह की खोज में निकलने को मजबूर हुए थे. साफ माहौल में इनसानों के इस विशाल सागर की परेशान बदहवास आवाजें गूंज रही थीं. पहिए चरमरा रहे थे और घोड़े हिनहिना रहे थे. वे आवाजें तेज जरूर थीं, पर इतनी तेज नहीं हो पाईं कि ऊपर सो रहे दोनों यात्रियों को जगा सकें.

पंक्ति के शुरू में बीस या इस से कुछ ज्यादा, गंभीर, कठोर चेहरों वाले, हाथ से काते गए साधारण कपड़े पहने और राइफल हाथ में लिए घुड़सवार थे. चट्टान कीतलहटी पर पहुंच कर वे रुके और आपस में सलाहमशविरा करने लगे.

“कुएं दाईं ओर हैं, मेरे भाइयो,” भिंचें होंठ अधपके बालों वाले एक आदमी ने कहा, जिस की दाढ़ीमूंछें नहीं थीं.

“सियरा ब्लैंको के दाईं ओर-जिस से हम रियो ग्रैंडे पहुंच सकते हैं.” दूसरा बोला, “पानी की चिंता मत करो” एक तीसरा बोला, “वह जो चट्टानों से पानी निकाल सकता है, अपने प्रिय भक्तों को ऐसे ही नहीं छोड़ देगा.”

“आमीन, आमीन!” पूरी पार्टी में प्रतिक्रिया हुई.

वे अपनी यात्रा शुरू करने ही वाले थे कि उन में सब से छोटों में एक तीव्र दृष्टि वाला अचानक चिल्ला उठा और उस ने ऊपर की चट्टान की ओर इशारा किया. चट्टान की चोटी पर, गुलाबी सा कुछ बदरंग चट्टानों के बीच चमक रहा था. उस को देखते ही घोड़ों की लगामें कसी गईं और बंदूकें तन गईं और ताजा घुड़सवार आगे बढ़ने लगे. हर होंठ पर ‘रेडस्किन’ शब्द चढ़ा था.

“यहां पर बहुत ज्यादा अमेरिकन भारतीय नहीं हो सकते,” बुजुर्ग आदमी ने कहा जो नेतृत्व कर रहा था. हम पौनियों को पार कर आए हैं और विशाल पर्वतों को पार कर लेने तक कोई और कबीले नहीं पड़ते.”

“क्या मैं आगे जा कर देखूं, ब्रदर स्टेंजरसन,” जत्थे में से एक ने कहा.

“और मैं,” “और मैं,” दरजनों आवाजें बोल पड़ीं. “अपने घोड़े नीचे छोड़ जाओ, और हम यहीं पर तुम्हाराइंतजार करेंगे,” बुजुर्ग ने जवाब दिया, पलभर में वे युवक अपने घोड़ों से नीचे उतरे, घोड़ों को बांधा और खतरनाक ढलान पर ऊपर चढ़ने लगे. उस चीज की ओर जिस की ओर उन का कौतूहल जागा था. वे शीघ्रता और चुपके से आगे बढ़ रहे थे और उन के आत्मविश्वास और निपुणता को देख कर लग रहा था मानो तजुर्बेकार स्काउट हों. नीचे खड़े दर्शक देख सकते थे कि कैसे वे एक चट्टान से दूसरी चट्टान की ओर छलांग लगा रहे थे. फिर उन की आकृतियां ऊपर नजर आने लगीं. वह युवक जिस ने सब का ध्यान आकर्षित किया था, उन का नेतृत्व कर रहा था. अचानक उस के पीछे चलने वालों ने देखा कि उस ने अचरज से हाथ उठा दिए और उस के पास पहुंचने पर वे भी उस दृश्य से उसी तरह प्रभावित हुए.

बंजर पहाड़ के एक छोटे से पठार पर एक बहुत बड़ी चट्टान थी और इस चट्टान के सहारे एक लंबा, लंबी दाढ़ी और कठोर नाकनक्श वाला, पर बेहद कमजोर आदमी लेटा है. उस का शांत चेहरा और नियमित सांसें बता रही थीं कि वह गहरी नींद में सो रहा है. उस के करीब ही एक नन्ही बच्ची थी, जिस के गोल, सफेद हाथ आदमी के भूरे गले में लिपटे थे और सुनहरे बालों वाला उस का सिर उस के शनील के कुरते की छाती पर टिका था. उस के गुलाबी होंठ खुले थे जिस के अंदर से उस के दूधिया सफेद दांत चमक रहे थे और उस के मासूम चेहरे पर एक चंचल मुसकान थी. उस के गबदू से सफेद पैर, जिन में वह सफेद मोजे और चमकीले बकल वाले साफजूते पहने थी. उस के साथी के मुरझाए अंगों से मेल नहीं खा रहे थे. इस चट्टान के ऊपर तीन गंभीर गिद्ध थे, जो नवागंतुकों को देख कर निराशा से चीत्कार करते, बेमन से वहां से उड़ गए.

उन घिनौने पक्षियों के शोरगुल से दोनों सोने वाले जाग गए और बदहवास से इधरउधर ताकने लगे. आदमी लड़खड़ाता हुआ अपने पैरों पर खड़ा हुआ और नीचे मैदान की देखने लगा जो उस वक्त बिलकुल खाली था जब वह सोया था और अब वह आदमी, औरतों और जानवरों से भरा था. उस के चेहरे पर अविश्वास का भाव झलकने लगा और उस ने अपना हड्डी जैसा हाथ आंखों पर फेरा, “इसी को शायद अवसाद कहते हैं,” वह बुदबुदाया. बच्ची उस के कोट का निचला हिस्सा पकड़े उस के पास खड़ी थी. वह कुछ नहीं बोली, पर बचपन की प्रश्नवाचक, कौतूहल भरी दृष्टि से चारों तरफ देखती रही.

बचाव पक्ष जल्दी ही दोनों भटके हुए यात्रियों को आश्वस्त करने में सफल हो गया कि वे लोग वास्तव में वहां हैं, कोई भ्रम नहीं है. उन में से एक ने बच्ची को उठा कर अपने कंधों पर बैठा लिया जबकि दो अन्यों ने उस के कमजोर साथी को सहारा दिया और दोनों को गाड़ियों की ओर ले कर चले.

“मेरा नाम जॉन फेरियर है,” यात्री ने बताया. मैं और यह नन्ही बच्ची ही इक्कीस लोगों के जत्थे में जिंदा बचे हैं. बाकी सब भूख और प्यास से मर चुके हैं.”

“क्या यह तुम्हारी बच्ची है?” किसी ने पूछा. “मुझे लगता है कि शायद यह अब मेरी हो गई है,” दूसरे ने कहा. “यह मेरी है क्योंकि मैं ने इसे बचाया है. कोई भी इसे मुझ से अलग नहीं कर सकता. आज के बाद यह लूसी फेरियर है. पर आप लोग कौन हैं?” कौतूहल से उन बचाने वालों की ओर नजर डालता हुआ वह बोला, “ऐसा लगता है कि तुम लोग संख्या में काफी हो.”

“लगभग दस हजार,” एक युवक बोला, “हम प्रभु की संतान हैं, फरिश्ते मेरोना के प्रिय.”

“मैं ने कभी इन का नाम नहीं सुना,” यात्री बोला, “ऐसा लगता है कि उस प्रभु ने काफी बड़ी भीड़ को चुना है.”

“जो पवित्र है, उस का मजाक मत उड़ाओ,” दूसरे ने सख्ती से कहा, “हम उन में से हैं, जो उन पवित्र ग्रंथों में विश्वास रखते हैं, जो मिस्र की लिपि में सोने की पतलीपतली प्लेटों पर लिखी गई हैं. जो जोजफ स्मिथ को पामीरा में सौंपी गई थीं. हम नौवू से आए हैं, जो इलिनोयस प्रदेश में है, जहां हम ने अपने मंदिर की स्थापना की है. हम हिंसक आदमी और नास्तिकों से भाग कर यहां शरण लेने आए हैं, जबकि यह रेगिस्तान के बीचोंबीच है.”

जॉन फेरियर के मन में नौवू का नाम सुनते ही कई यादें ताजा हो गईं, “अच्छा,” वह बोला, “तुम मॉरमॉन लोग हो.”

“हम मॉरमॉन ही हैं,” बाकी लोग एक स्वर में बोले.

“और तुम कहां जा रहे हो?”

“हम को नहीं मालूम, हमारे पैगंबर के रूप में प्रभु का हाथ हमें कहीं ले जा रहा है. तुम को उस के सामने आना पड़ेगा. वही बताएगा कि तुम्हारे साथ क्या करना होगा.”

इस समय तक वे पहाड़ की तलहटी पर पहुंच चुके थे और यात्रियों से घिर गए-पीले चेहरों वाली सहमी सी औरतें, तंदुरुस्त, खिलखिलाते बच्चे और चिंतित, चौकन्नी नजरों वाले पुरुष. उन के बीच से अचरज और करुणा के अनेक स्वर उभरे, जब उन्होंने एक अजनबी की नाजुक उमर देखी और दूसरे की लाचारी, पर उन को यहां तक लाने वाले रुके नहीं, भीड़ को ठेलते आगे बढ़ते गए. उन के पीछेपीछे मॉरमॉनों की भीड़ चली.

वे एक गाड़ी तक पहुंचे, जो अपने विशाल आकार, चटकीले रंग और खूबसूरती की वजह से स्पष्ट नजर आ रही थी. उस पर छह घोड़े जुते थे, जबकि दूसरी गाड़ियों में दो या ज्यादा से ज्यादा चार घोड़े जुते थे. गाड़ीवान के पास एक आदमी बैठा था, जो उमर में तीस साल से ज्यादा का नहीं रहा होगा, पर उस का बड़ा सा सिर और दृढ़ भाव दिखा रहे थे कि वही इन सब का सरदार है. वह कत्थई रंग की कोई किताब पढ़ रहा था. जब भीड़ उस के पास पहुंची, उस ने वह किताब एक तरफ रख दी और ध्यान से सारी घटना सुनने लगा फिर वह उन भटके हुए यात्रियों की ओर मुड़ा.

“अगर हम तुम को अपने साथ ले जाते हैं,” गंभीरशब्दों में उस ने कहा, “तो सिर्फ हमारे धर्म को मानने वालों के रूप में ही. हम अपने बीच भेड़िए नहीं रख सकते. बेहतर होगा कि तुम्हारी हड्डियां इस बियाबान में सूखें, बजाए इस के कि तुम वह सड़ांध बनो जो समय के साथ सारे फल को सड़ा देता है. क्या तुम इन शर्तों पर हमारे साथ आना चाहोगे?”

“मैं सोचता हूं कि मैं किसी भी शर्त पर आप के साथ चलने को तैयार हूं,” फेरियर ने इतना जोर दे कर कहा कि गंभीर मुद्रा वाले बुजुर्ग बिना मुसकाए नहीं रह सका. सिर्फ सरदार अपनी गंभीरता का भाव मुंह पर ओढ़े रहा.

“इस को कबूल कर लो, ब्रदर स्टेंजरसन!” उस ने कहा. “इस को खाना और पानी दो और बच्ची को भी. तुम्हारा काम यह भी है कि तुम अपनी जाति के पवित्र तौरतरीके इस को सिखाओ. हम पहले ही काफी देर कर चुके हैं. आगे बढ़ो! जियोन की ओर, जियोन की ओर!”

“जियोन की ओर, जियोन की ओर!” मॉरमॉनों की भीड़ चिल्लाई और पूरे कारवां में ये शब्द लहर की तरह उठे, एक मुंह से दूसरे मुंह तक और आखिर में बहुत दूरी पर एक फुसफुसाहट बन कर रह गए. चाबुक तन गए और पहिए चरमराने लगे. बड़ीबड़ी गाड़ियां चल पड़ीं और पूरा कारवां एक बार फिर से हरकत में आ गया. जिस बुजुर्ग के सुपुर्द दोनों कमजोर प्राणी किए गए थे, वह अपने कारवां में उन को ले गया, जहां उन के लिए भोजन पहले से ही तैयार रखा था.

“तुम यहां पर रहोगे,” वह बोला, “कुछ ही दिनों मेंतुम्हारी थकान उतर जाएगी. फिलहाल याद रखना कि अब और हमेशा के लिए तुम हमारे धर्म के हो. ब्रिगहम यंग ने कह दिया है और उस ने जोजफ स्मिथ की आवाज में कहा है, जो प्रभु की आवाज है.”

यह जगह उन मॉरमॉनों के द्वारा उठाई गई परेशानियों और परीक्षाओं को याद करने की नहीं है. मिसीसिपी के किनारों से रॉकी पर्वतों के पश्चिमी घाटों तक, वे ऐसे संघर्ष करते रहे, जिस का इतिहास में सानी नहीं है. जंगली आदमी, जंगली जानवर, भूख, प्यास, थकान, रोग, हर बाध जो प्रकृति उन के सामने डाल सकती थी- सभी कुछ आंग्ल सैक्सन सिद्धांतों से काबू में किया गया. फिर भी, लंबी यात्रा और बारबार आने वाले खतरों की वजह से उन में से मजबूत से मजबूत भी दहल गया था. उन में से एक भी ऐसा नहीं था जिस ने घुटनों के बल बैठ कर प्रभु को दिल से शुक्रिया अदा न किया हो. जब उन लोगों ने सूरज की रोशनी में नहाई यूटाह की घाटी को देखा और अपने सरदार से सुना कि यही वह जगह है, जिस का प्रभु ने उन को वादा किया था और ये परती मैदान अब से हमेशा के लिए उन के हैं.

यंग ने जल्दी ही साबित कर दिया कि वह कुशल प्रशासक और दृढ़ सरदार है. नक्शे खींचे गए और चित्र बनाए गए, जिस में भविष्य के शहर की रूपरेखा तैयार की गई. चारों ओर खेतों को बांटा गया और प्रत्येक व्यक्ति को हैसियत के हिसाब से जमीन दी गई. हरेक को अपनी क्षमता का काम दिया गया. शहर में सड़कें और चौक ऐसे प्रकट हुए, मानो जादू हुआ हो. शहर में नालियां बनीं, झाड़ियां उगीं, पौधे लगाए गए, सफाई हुई और अगली गरमी ने पूरे शहर को गेहूं की फसल सेसुनहरा पाया. इस विचित्र इलाके में सब ओर विकास हुआ. सब से ज्यादा, जो मंदिर उन्होंने शहर के बीच में स्थापित किया था और भी लंबा और बड़ा हो गया. ऊषा की पहली लाली से ले कर ढलने तक, इस इमारत में हथौड़े की गूंज और आरी की आवाज कभी नहीं रुकती, जो यहां के निवासियों ने उस प्रभु के लिए बनाई थी, जो उन्हें सुरक्षित यहां तक लाया था.

दोनों बचे हुए प्राणी, जॉन फेरियर और छोटी बच्ची, जिस को उस ने गोद लिया था और जो अब उस की संपत्ति की वारिस थी, मॉरमॉनों के साथ उन की यात्रा के अंत तक रहे. नन्ही लूसी फेरियर बड़े आराम से बुजुर्ग स्टेंजरसन की गाड़ी में जा रही थी, जिस में मॉरमॉन की तीन बीवियां और एक बारह साल का जिद्दी बेटा भी था. जल्दी ही वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई और मां की मृत्यु के गम से बाहर निकल आई. जल्दी वह उन स्त्रियों की लाडली बन गई और उसे अपने चलतेफिरते, कैनवस से ढके नए घर की आदत पड़ गई. इस दौरान अपनी तकलीफों को भूल कर फेरियर ने भी अपने को एक जरूरी मार्गदर्शक और चुस्त शिकारी सिद्ध कर दिया. इतनी जल्दी वह अपने नए मित्रों की नजरों में चढ़ गया, कि जब वे अपनी यात्रा के अंत पर पहुंचे, सर्वसम्मति से निश्चय किया गया कि उस को भी उतना ही बड़ा उपजाऊ खेत दिया जाए, जितना (किसी भी दूसरे को दिया गया था) खुद यंग, स्टेंजरसन, केंबल, जॉनस्टन और ड्रेबर, जो चार मुख्य बुजुर्ग थे, के सिवा किसी भीदूसरे को दिया गया था.

इस तरह मिले हुए खेत पर जॉन फेरियर ने अपने लिए एक बड़ा सा लकड़ी का घर बनाया, जिस में साल दर साल इतने सारे नए निर्माण किए कि वह एक बहुत बड़ी हवेली लगने लगा. वह समझदार, अपने लेनदेन में चौकन्ना और हाथों से निपुण था. उस का मजबूत शरीर उस को रातदिन काम करने देता, जिस से वह अपनी जमीन को सुधारता और जोतता रहता. इसलिए ऐसा हुआ कि उस के खेत और उस की हर संपत्ति में बहुत तरक्की हुई: तीन सालों में वह अपने पड़ोसियों से बेहतर स्थिति में था. छह सालों में वह समृद्ध, नौ में अमीर. बारह सालों में पूरी साल्ट लेक सिटी में आधा दरजन लोग भी ऐसे नहीं थे, जो उस से मुकाबला कर सकते. विशाल समुद्र से ले कर दूरदराज वाहसाच पर्वतों तक, जॉन फेरियर से ज्यादा प्रसिद्ध नाम दूसरा नहीं था.

एक ही मुद्दा, सिर्फ एक मुद्दा ऐसा था, जिस से उस ने अपने सहधर्मियों की भावनाओं को दुखाया था. किसी भी बहस या अनुरोध के बावजूद वह अपने अन्य साथियों की तरह अपने घर में किसी औरत को रखने के लिए तैयार नहीं था. उस ने अपनी इस अड़ियल मनाही का कोई कारण नहीं दिया. पर अपने इस फैसले पर अडिग रहा. कुछ ने उस पर आरोप लगाया कि वह अपने धर्म के प्रति ठंडा है और दूसरों ने समझा कि वह धन का लालची है और अपने धन को किसी और पर खर्च नहीं करना चाहता. दूसरों ने इस को किसी भूलीमोहब्बत की वजह बताया कि कैसे एक सुंदर लड़की इस की याद में अटलांटिक में तिलतिल घुल रही है. वजह जो भी हो, फेरियार कुंआरा ही रहा. दूसरे हर मामले में उस ने इस नए शहर का धर्म कबूल किया और एक रूढ़िवादी और ईमानदार आदमी होने का नाम कमाया.

लूसी फेरियर इस लकड़ी के मकान में बड़ी हुई और अपने पिता के हर काम में हाथ बंटाती, पहाड़ों की शुद्ध हवा और ताड़ के पेड़ों की खुशबू इस छोटी बच्ची की मां और दाई बन गए. जैसेजैसे साल बीतते गए, वह लंबी और ताकतवर बनती गई. उस के गालों पर लाली और चाल में लचीलापन आता गया. फेरियर के खेत के पास से गुजरने वाली सड़क से गुजरने वाले यात्री इस कमसिन लड़की को गेहूं के खेतों में उछलते या अपने पिता के घोड़े पर बैठते देखते तो उन की भूलीबिसरी यादें लौट आतीं. इस तरह कली खिल कर फूल बन गई और जिस साल उस के पिता सब से अमीर किसान बने, उस साल वह अमरीकी नवयौवनाओं की खूबसूरती की ऐसी मिसाल बनी, जैसे पूरे प्रशांत की ढलान पर दिखने को नहीं मिल सकती थी.

पर वह उस का पिता नहीं था जिस ने सब से पहले यह जाना कि बच्ची अब युवती बन चुकी है. ऐसे मामलों में ऐसा बहुत कम होता है. वह रहस्यमयी बदलाव इतना सूक्ष्म और इतना धीमा होता है कि उसे तारीखों से नहीं नापा जा सकता. युवती खुद भी यह नहीं समझ पाती है, जब तक किसी आवाज की लय या किसी हाथ का स्पर्शउस के दिल को पुलकित नहीं कर देता और गर्व और भय के साथ वह समझ जाती है कि उस के अंदर एक नई और बड़ी प्रकृति जाग चुकी है. बहुत कम युवतियां ऐसी होती हैं, जिन को वह दिन याद नहीं होता या वह छोटी सी घटना याद नहीं होती जिस से उस के जीवन में नई शुरुआत हुई थी. लूसी फेरियर के मामले में यह अवसर अपनेआप में गंभीर था और उस की किस्मत तथा कई और लोगों की किस्मत पर असर डालने वाला था.

वह जून की एक गरम सुबह थी और लैटर डे संत उन्हीं मधुमक्खियों की तरह व्यस्त थे, जिन के छत्तों को उन्होंने अपना चिन्ह बनाया था. खेतों में और सड़कों पर इसी व्यस्तता की गूंज थी. धूल भरी ऊंची सड़कों पर भारी सामान ढोते खच्चरों की कतारें धूल उड़ाती पश्चिम की ओर जा रही थीं, क्योंकि कैलीफोर्निया में सोने का बुखार चढ़ चुका था और वहां पहुंचने का रास्ता इस शहर से गुजरता था. वहां भेड़ों और बैलों के झुंड भी आ रहे थे और थके हुए यात्री, आदमी और घोड़े भी अपनी यात्रा से थक कर आ रहे थे.

इस विविध भीड़ में, एक मंझे हुए घुड़सवार की तरह लूसी फेरियर घोड़े को दौड़ाती आ रही थी. उस का गोरा चेहरा इस कसरत से लाल हो गया था और उस के लंबे सुनहरे बाल उस के पीछे उड़ रहे थे. उस के पिता ने उस को शहर किसी काम से भेजा था और वह तेजी से जा रही थी जैसा पहले कई बार जा चुकी थी, यौवन की निडरता से, सिर्फ यह सोचती हुई कि उस को क्या काम करना है और कैसे करना है. यात्रा से गंदे यात्री उस को हैरानी से देख रहे थे और भावशून्य भारतीय भी अपने सामान के साथ जाते हुए इस गोरी युवती का सौंदर्य निहारने लगे थे.

वह शहर के बाहर पहुंची कि उस ने पाया कि मैदानों से आए आधा दर्जन चरवाहों द्वारा हांकी गईं बहुत सी भेड़ों का झुंड सड़क रोके खड़ा है. बेसब्री से उस ने इस अड़चन को पार करने के लिए एक खाली सी दिखने वाली जगह में अपने घोड़े को ले जाने की कोशिश की. वह वहां तक मुश्किल से पहुंची भर ही थी कि जानवरों ने उसे घेर लिया और उस ने पाया कि वह गुस्सैल आंखों और पैने सींगों वाले बैलों की चलती सी लहर के बीच पूरी तरह फंस चुकी है.
  उस को ढोरों से निपटने की आदत थी, इसलिए इस स्थिति में वह घबराई नहीं, पर हर मौके का फायदा उठाती हुई अपना घोड़ा आगे बढ़ाती गई, इस उम्मीद में कि वह आगे निकलने का रास्ता निकाल लेगी. बदकिस्मती से एक जानवर के सींग, जानबूझ कर या गलती से, उस के घोड़े की कमर से जोर से टकराए और वह उत्तेजना से पागल हो गया. एक क्षण में वह अपने पिछले पैरों पर जोर से हिनहिनाता हुआ खड़ा हो गया और इस तरह कूदने लगा कि उस पर कोई कुशल घुड़सवार ही टिका रह सकता था.

हालत जोखिम भरी हुई थी. उत्तेजित घोड़े की हर छलांग उसे फिर से सींगों के पास ले जाती और फिर सेवह पागल हो जाता. लड़की बड़ी हिम्मत से घोड़े की काठी पकड़े रही, पर अगर एक बार फिसल जाती तो इस का मतलब होता उन डरे हुए बदहवास जानवरों के खुरों के नीचे कुचल कर भयानक मौत. इस प्रकार की अचानक आपदा की वह आदी नहीं थी. उस का सिर चकराने लगा और घोड़े की लगाम से उस की पकड़ ढीली पड़ने लगी, धूल के गुबार से उस का दम घुटने लगा. वह हताश हो कर बचने का प्रयास छोड़ने ही वाली थी कि अपने पास से आती एक आवाज से उस को सहायता का आश्वासन मिला. उसी समय एक भूरे हाथ ने डरे हुए घोड़े की रस्सी को पकड़ लिया और जानवरों के झुंड को चीरता हुआ उसे बाहर निकाल लाया.

“आशा करता हूं कि तुम्हें चोट नहीं लगी होगी,” उस के रक्षक ने अदब से कहा.

उस ने उस के भूरे, कठोर चेहरे को देखा और ढिठाई से हंसी, “मैं बहुत डरी हुई हूं,” अल्हड़ता से उस ने कहा; “कौन सोच सकता था कि पौंचो गायों के झुंड से इतना डर जाएगा.”

“गनीमत है कि तुम घोड़े पर जमी रही,” दूसरे ने आतुरता से कहा. वह एक लंबा, खूंखार सा दिखने वाला युवक था, जो एक मजबूत घोड़े पर सवार था और शिकारी की सी पोशाक पहने था. उस के कंधे पर एक लंबी सी राइफल टंगी थी. मेरे खयाल से तुम जॉन फेरियर की बेटी हो,” उस ने कहा, “मैं ने तुम को उस के घर से आते हुए देखा था. जब तुम उस से मिलो, तो उसे पूछना कि क्या उसे सेंट लुई के जेफरसन होप की याद है. अगर यह वही फेरियर है, तो मेरे पिता और वह अच्छे मित्र थे.”

“क्या यह बेहतर नहीं होगा कि तुम खुद ही आ कर उन से यह बात पूछ लो?” जलाते हुए उस ने पूछा.

युवक इस प्रस्ताव से खुश नजर आया और उस की काली आंखें खुशी से चमकने लगीं. “मैं ऐसा ही करूंगा,” वह बोला, “हम दो महीनों से पहाड़ों पर हैं और अभी किसी के घर जाने की हालत में नहीं हैं. उन्हें हम को इसी हालत में स्वीकार करना होगा.”

“वह तुम्हारे बहुत आभारी होंगे, और मैं भी,” उस ने जवाब दिया, वह मुझ से बेहद प्यार करते हैं, अगर गाएं मेरे ऊपर कूद गई होतीं, तो वह यह गम कभी नहीं भूल पाते.”

“न मैं भूल पाता,” युवक बोला.

“तुम! मैं यह नहीं समझ पा रही कि तुम को क्यों फर्क पड़ता. तुम तो हमारे दोस्त तक नहीं हो.”

युवा शिकारी का चेहरा यह सुन कर इतना उदास हो गया कि लूसी फेरियर जोर से हंस पड़ी.

“अब देखो, मेरा मतलब यह नहीं था,” वह बोला, हां, अब तुम मेरे मित्र हो. तुम को हमारे घर जरूर आना पड़ेगा. अब मुझे जाना चाहिए, नहीं तो पापा आइंदा मुझे अपने काम नहीं सौंप सकेंगे, गुडबाय!”

युवक जेफरसन होप अपने साथियों के साथ आगे बढ़ता गया, गंभीर और चुपचाप. वह और उस के साथीनेवादा पर्वतों में चांदी की तलाश में निकले थे, और अब सॉल्ट लेक सिटी लौट कर कुछ धन कमाना चाह रहे थे, जिस से कुछ जल मार्गों पर काम कर सकें जो उन्होंने ढूंढ़ निकाले थे. इस काम के प्रति वह औरों की तरह ही सजग था, पर इस अचानक हुई घटना ने उस का ध्यान बंट गया था. सियरा की हवाओं की तरह ताजी और स्पष्ट इस खूबसूरत लड़की की झलक से उस के दिल का ज्वालामुखी सुलगने लगा था.

जब वह उस की नजर से ओझल हो गई तो वह समझ गया कि उस की जिंदगी में एक उलझन पैदा हो गई है और धन कमाना या कोई और प्रश्न अब उस के लिए इस उलझन के सामने कोई मायने नहीं रखता. उस के दिल में जो मोहब्बत पनपी थी, किसी बालक की सी क्षणिक नहीं थी बल्कि एक दृढ़ और गुस्सैल आदमी की तीव्र चाहत थी. अब तक उस को आदत थी कि जो भी करता, उस में सफलता हासिल करता. उस ने अपने मन में कसम खाई कि वह इस में भी असफल नहीं होगा और हर संभव प्रयास करेगा.

उस रात वह जॉन फेरियर से मिलने गया और उस के बाद भी कई बार गया, और फिर उस (फार्म हाउस) घर में व एक परिचित चेहरा बन गया. पिछले बारह सालों में घाटी तक सीमित रहने और काम में मशगूल होने की वजह से जॉन को बाहरी दुनिया के बारे में जानने के बहुत कम अवसर मिले. जेफरसन होप ने उस को ये सारी जानकारी दीं, इस अंदाज में जो लूसीफेरियर को भी पसंद आया और उस के पिता को भी. वह कैलीफोर्निया में रहा था और उसे दौलत कमाने और दौलत खोने के कई अजीबोगरीब अनुभव हुए थे.

वह एक स्काउट भी रहा था और चांदी खोजने वाला भी, शिकारी और पशुपालक भी. किसी भी साहसिक कारनामे की भनक मिलते ही जेफरसन होप वहां जा पहुंचता. जल्दी ही वह बूढ़े किसान का चहेता बन गया, जो उस के गुणगान करता रहता. इन अवसरों पर, लूसी चुप रहती, पर उस के गालों की लाली और प्रसन्न, चमकती आंखें साफ बता देतीं कि उस का दिल अब उस का नहीं रहा. उस के ईमानदार पिता को भले ही ये चिन्ह दिखाई नहीं देते, पर उस व्यक्ति से छिपे नहीं रहे, जिस ने उस का दिल जीता था.

एक गरम शाम वह सड़क पर घुड़दौड़ करता आया और गेट में प्रवेश किया. वह दरवाजे पर ही थी और उस से मिलने बाहर चली आई. उस ने घोड़े की काठी चहारदीवारी पर डाली और पगडंडी पर उस की ओर चला.

“मैं जा रहा हूं, लूसी,” उस के दोनों हाथ अपने हाथों में ले कर और उस की ओर कोमलता से देखते हुए वह बोला. “मैं तुम से अभी अपने साथ चलने को नहीं कहूंगा, पर जब मैं फिर से यहां आऊंगा तब क्या तुम मेरे साथ चलने के लिए तैयार हो?”

“और यह कब होगा?” उस ने शर्म से लाल पड़ कर हंसते हुए कहा.

“ज्यादा से ज्यादा दो महीने. मैं तब आ कर तुम्हारा हाथ मांगूंगा, प्रिये, हमारे बीच कोई नहीं आ सकता.”

“और पिताजी?” उस ने पूछा.

“उन्होंने अपनी हामी दे दी है, अगर हम इन खानों में काम शुरू कर दें. उस ओर से मुझे कोई डर नहीं है.”

“तो ठीक है. अगर पिताजी और तुम ने फैसला कर लिया है, तो अब कहने के लिए कुछ नहीं है,” उस के चौड़े सीने पर अपने गाल टिकाते हुए धीरे से उस ने कहा.

“बहुत अच्छा.” उस ने भरे गले से उस को झुक कर चूमते हुए कहा. “फिर यह बात तय हो गई है. मैं जितनी देर यहां रहूंगा, यहां से जाना उतना ही कठिन हो जाएगा. वे लोग दर्रे पर मेरा इंतजार कर रहे हैं. गुडबाय डार्लिंग, गुडबाय. दो महीनों में तुम मुझ देखोगी.”

बोलतेबोलते उस ने अपने को उस से अलग किया और अपने घोड़े पर सवार हो कर जल्दी से चला गया. उस ने मुड़ कर एक बार भी नहीं देखा, मानो डर रहा हो कि कहीं पलट कर देखा तो जाने का फैसला डगमगा जाएगा. वह गेट पर खड़ी उस को तब तक देखती रही, जब तक वह नजरों से ओझल नहीं हो गया. फिर वह घर के अंदर चली गई, पूरे यूटाह की सब से खुश लड़की.

सॉल्ट लेक सिटी से जेफरसन होप और उस के साथियों को गए तीन हफ्ते बीत चुके थे. जॉन फेरियर का दिल यह सोचसोच कर भारी था कि उस की गोद ली हुई बेटी उस से जुदा हो जाएगी. पर उस का चमकता हुआ प्रसन्न चेहरा उसे इस फैसले को सही मानने के लिए मजबूर कर रहा था.
उस ने हमेशा अपने दिल की गहराइयों से चाहा था कि किसी भी कीमत पर वह अपनी बेटी की शादी किसी मॉरमॉन से नहीं करेगा. वह ऐसी शादी को शादी नहीं बल्कि अपनी तौहीन समझता था. मॉरमॉन फलसफे के बारे में उस के जो भी खयालात थे, पर इस एक मामले में वह अडिग था. पर इस विषय पर उस को अपने होंठ सीने पड़े थे, क्योंकि उन दिनों संतों के उस देश में परंपरा के विरुद्ध कोई भी राय जाहिर करना खतरनाक था.

हां, खतरनाक. इतना खतरनाक कि उन का बड़े से बड़ा संत भी अपनी धार्मिक सोच दबी सांस में जाहिर करता, कि कहीं उस के होंठों से ऐसा कुछ न निकले जिस का उलटा मतलब निकाल लिया जाए और उस को कड़ी सजा भुगतनी पड़े. अभी तक जो लोग अन्याय के शिकार थे, वे ही अब खूंखार अन्यायी बन चुके थे. न सेविल का इनक्विजिशन, न जरमनी का वेह्मगिरिश्ट, न इटली की गुप्त संस्थाएं इतनी भीषण थीं, जितनी यूटाह देश को काले बादलों की तरह घेरे थी.

इस संस्था की अदृश्यता और रहस्यमयता ने इस कोऔर भी भयावह बना रखा था. यह सर्वज्ञाता और सर्वशक्तिमान थी, पर न देखी जाती थी और न सुनी जाती थी. जिस आदमी ने चर्च से विद्रोह किया, वह गायब हो गया और किसी को नहीं मालूम पड़ा कि वह कहां गया या उस का क्या हुआ. घर पर उस की बीवी और बच्चे उस का इंतजार करते रहे, पर कोई भी पिता उन को यह बताने वापस नहीं आया कि गुप्त न्यायाधीशों ने उस के साथ कैसा सुलूक किया. कोई भी बगैर सोचे समझे कहा गया शब्द या किया हुआ काम उस व्यक्ति का सफाया कर देता. फिर भी किसी को इस खतरनाक ताकत के बारे में कुछ नहीं मालूम था, जो उन के ऊपर मंडराती रहती थी. इसलिए, इस में कोई आश्चर्य नहीं कि पुरुष डरते कांपते अपना काम करते और बियाबान में भी वे उस संशय का जिक्र नहीं करते, जो उन्हें सता रहा था.

पहले पहल तो यह अजीब और भयंकर ताकत सिर्फ उन पर वार करती थी, जो मॉरमॉन धर्म अपनाने के बाद उस का या तो उल्लंघन करते या छोड़ देते थे. पर जल्दी ही इस खौफ का दायरा बढ़ता गया. औरतों की संख्या घट रही थी और बगैर औरतों के बहुविवाह प्रथा का पालन करना असंभव था. अजीब-अजीब अफवाहें फैल रहीं थीं. कत्ल हुए लोगों के बारे में और ऐसीऐसी जगहों पर सशस्त्र कैंपों के बारे में, जहां कभी कोई भारतीय पहले नहीं देखा गया था. बुजुर्गों के हरम में रोज नई औरतों का प्रवेश होता. औरतें रोती, तड़पती रहतीं औरउन के चेहरों पर खौफ का साया मंडराता रहता. पहाड़ों पर देर तक रहने वाले यात्री नकाबपोश, चालाक और निश्शब्द घूमते सशस्त्र गिरोहों की बात करते, जो अंधेरे में उन के इर्दगिर्द मंडरा रहे थे. इन कहानियों और अफवाहों को तूल मिला और ये इतनी बार सुनी सुनाई गईं कि सच्ची लगने लगीं. आज तक पश्चिम के उन वीरान चरागाहों में डेनाइट गिरोह या एवेंजिंग एंजिल्स का नाम खौफ और बदनसीबी से जुड़ा है.

इन खौफनाक परिणामों के बारे में ज्यादा जानकारी पाने से लोगों के मन का डर घटने की बजाए और भी बढ़ जाता. किसी को नहीं मालूम था कि कौन किस संस्था से जुड़ा है. धर्म के नाम पर खून और हिंसा की वारदातों में शामिल होने वालों के नाम पूरी तरह गुप्त रखे जाते थे. इस बात का पूरा अंदेशा था कि जिस दोस्त के सामने आप ने सरदार और उस के मिशन के बारे में अपने दिल की बात कही, वही रात आग और तलवार ले कर आप को खौफनाक सबक सिखाने वालों में एक हो. इसलिए हर आदमी अपने पड़ोसी से डरा रहता और कोई भी अपने दिल की बात औरों से नहीं बताता.

एक सुबह जॉन फेरियर अपने गेहूं के खेतों की ओर जाने वाला था कि उस ने गेट खुलने की आवाज सुनी. खिड़की से बाहर देखने पर उस ने एक हट्टाकट्टा, अधपके बालों वाला, अधेड़ अवस्था का आदमी पगडंडी से अंदर आते देखा.
उस का कलेजा मुंह को आ गया जब उस ने देखा कि आने वाला और कोई नहीं, महान बिग्रहम यंग खुद था. आशंका से भर कर, क्योंकि वह जानता था कि इस मेहमान का आना उस के लिए अच्छा साबित नहीं होगा. फेरियर मॉरमॉन सरदार का स्वागत करने के लिए दरवाजे की ओर भागा. पर आगंतुक ने उस के अभिवादन का बड़े ठंडेपन से जवाब दिया और चेहरे पर सख्त भाव लिए उस के पीछेपीछे बैठक तक गया.

“ब्रदर फेरियर,” बैठते हुए उस ने कहा और अपनी हलके रंग की पलकों के नीचे से किसान को गौर से देखने लगा. हमारे धर्म के सच्चे उपासक तुम्हारे अच्छे मित्र रहे हैं. हम ने तुम को तब पनाह दी, जब तुम रेगिस्तान में भूखेप्यासे पड़े थे. हम ने तुम्हारे साथ अपना खाना बांटा, तुम को सुरक्षित इस घाटी तक लाए, तुम को अपनी जमीन का काफी हिस्सा दिया. अपनी रक्षा में तुम को अमीर बनने दिया. क्या ऐसा नहीं हुआ?”

“ऐसा ही हुआ.” जॉन फेरियर ने जवाब दिया.

“इस सब के बदले हम ने सिर्फ एक शर्त रखी थी, जो यह थी कि तुम सच्चे धर्म को अपनाओगे और हर तरह से उस के नियमों का पालन करोगे. तुम ने ऐसा करने का वादा किया था और इस वादे को तुम ने तोड़ा है, जैसे आमतौर पर माना जा रहा है.”

“मैं ने किस तरह इस वादे को तोड़ा है?” फेरियर ने हैरत से हाथ ऊपर उठाते हुए कहा. “क्या मैं ने अपना पैसा लोगों की भलाई में नहीं लगाया है? क्या मैं प्रार्थनाओं में शरीक नहीं हुआ? क्या मैं ने…?”

“तुम्हारी बीवियां कहां हैं?” यंग ने चारों ओर देखते हुए कहा. “उन को यहां बुलाओ, जिस से मैं उन का अभिवादन कर सकूं.”

“यह सच है कि मैं ने शादी नहीं की है.” फेरियर ने जवाब दिया. “पर औरतें गिनती में कम थीं और दूसरे आदमियों का उन पर ज्यादा हक था. मैं कभी अकेला नहीं रहा. मेरे पास मेरी बेटी है जो मेरा ध्यान रखती है.”

“उसी बेटी के बारे में मैं तुम से बात करना चाहता हूं.” मॉरमॉनों के नेता ने कहा. “वह बड़ी हो कर यूटाह का फूल बन चुकी है और उन की आंखों को अच्छी लगने लगी है, जो इस देश में ऊंचे ओहदों पर हैं.”

जॉन फेरियर का दिल डूब गया.

“उस के बारे में किस्से हैं जिन पर मैं विश्वास नहीं करना चाहता. किस्से कि उस का किसी दूसरे धर्म वाले से संबंध है. पर ये केवल खाली दिमागों वाले लोगों द्वारा फैलाई गई अफवाहें हो सकती हैं.”

“संत जोजफ स्मिथ की संहिता में तेरहवां नियम क्या है?” सच्चे धर्म की हर कन्या को धर्म के अंदर ही शादी करनी चाहिए. अगर वह किसी और से शादी करती है, तो यह घोर पाप माना जाएगा. ऐसा होने की वजह से यह असंभव है कि तुम, जो अपने को इस पवित्र धर्म को मानने वाला कहते हो, अपनी बेटी को इस का उल्लंघन करने दोगे.”

जॉन फेरियर ने कोई जवाब नहीं दिया, पर वह घबराहट के मारे अपने घोड़े के चाबुक से खेलता रहा.

“इस एक मुद्दे से तुम्हारी पूरी आस्था की परीक्षा हो जाएगी. यह बात काउंसिल ऑफ फोर में तय की गई है. लड़की अभी कम उमर की है और हम किसी सफेद बालों वाले बूढ़े से उस की शादी नहीं करना चाहते. हम उस को चुनाव करने से भी नहीं वंचित करना चाहते. हम बुजुर्गों की कई बीवियां हैं, पर हमारे बच्चों का भी खयाल रखा जाना चाहिए. स्टेंजरसन का एक बेटा है और ड्रेबर का भी एक बेटा है और दोनों में से कोई भी तुम्हारी बेटी को अपने घर ले जाने के लिए तैयार हैं. इस को उन दोनों के बीच चुनने की आजादी है. वे जवान भी हैं और अमीर भी और सच्चे धर्म के हैं. इस बात पर तुम क्या कहते हो?”

काफी देर तक फेरियर चिंता में चुपचाप बैठा रहा.

“आप हम को कुछ वक्त दीजिए,” आखिर में वह बोला, “मेरी बेटी अभी बहुत छोटी है. वह शादी की उमर की नहीं हुई है.”

“उस को एक महीने की मोहलत दी जाएगी.” यंग ने कुरसी से उठते हुए कहा. “इस मोहलत के अंत में उस को अपना जवाब देना होगा.”

वह दरवाजे से बाहर निकल रहा था कि तमतमाए चेहरे और आग उगलती आंखों से वह मुड़ा. “तुम्हारे लिए बेहतर यही होता, जॉन फेरियर,” वह गरजा, “तुम और वह भी इस वक्त सियरा ब्लैंको में सूखी हड्डियां बने होते, बजाए इस के कि तुम अपनी कमजोर मर्जी पवित्र चार के हुक्मनामा के खिलाफ चलाते.”

हाथ से धमकाने का इशारा करते हुए वह दरवाजे से मुड़ा और फेरियर को उस के भारी कदमों की आहट पथरीली पगडंडी से जाती सुनाई पड़ी.

वह अभी भी घुटनों पर कोहनी रखे बैठा यह सोच रहा था कि वह यह मामला अपनी बेटी को कैसे बताए, जब एक कोमल हाथ उस के हाथों पर रखा गया और ऊपर देखने पर उस ने उस को अपने पास खड़ा पाया. उस के पीले भयभीत चेहरे की एक झलक देखते ही वह समझ गया कि उस ने सारी बातचीत सुन ली है.

“मैं क्या कर सकती थी,” पिता की नजरों का जवाब देते हुए वह बोली. “उस की आवाज पूरे घर में गूंज रही थी. ओह पापा, पापा, अब हम क्या करेंगे?”

“तुम को डरने की कोई जरूरत नहीं है,” उस को सीने से लगा कर अपने सख्त हाथ उस के सुनहरे बालों पर फेरते हुए वह बोला, “हम कुछ न कुछ तरकीब कर लेंगे. उस युवक के साथ तुम्हारी मोहब्बत कम तो नहीं हुई है?”

एक सिसकी और उस के हाथ पर पड़े दबाव से उस को जवाब मिल गया.

“नहीं, बिलकुल नहीं. मैं यह सुनना नहीं चाहता कि तुम्हारी मोहब्बत कम हो गई है. वह एक अच्छा लड़का है और ईसाई है. वह यहां के इन लोगों से ज्यादा धर्म भीरु है, जो इतनी पूजा और प्रचार करते हैं. कल नेवाडा के लिए एक पार्टी रवाना हो रही है और मैं उन को संदेश भेज दूंगा कि हम यहां कितनी मुसीबत में पड़ गए हैं.

अगर उस युवक के बारे में मेरी जानकारी सही है तो वह यहां तार से भी ज्यादा तेजी से आएगा.”

पिता की बात सुन कर लूसी आंसुओं के बीच हंस पड़ी.

“जब वह आएगा, वह हम को सही राय देगा. पर बेटी, मुझे तुम्हारी ओर से डर लग रहा है. जो लोग पैगंबर के खिलाफ जाते हैं, उन के बारे में कैसेकैसे भयानक किस्से सुनने में आते हैं, उन के साथ कुछ न कुछ खौफनाक जरूर घटता है.”

“पर अभी तो हम उस के खिलाफ नहीं गए हैं,” उस के पिता ने जवाब दिया. “डरने का वक्त तो तब आएगा जब हम खिलाफ जाएंगे. हमारे सामने अभी एक पूरा महीना है, उस के आखिर में, मैं समझता हूं, कि सब से अच्छा यही होगा कि हम यूटाह से भाग जाएं.”

“यूटाह छोड़ देंगे?”

“हां, मेरा यही मतलब था.”

“पर खेत और जमीन?”

“जितना बेच सकेंगे, उतने का हम पैसा इकट्ठा कर लेंगे. बाकी जमीन यूं ही छोड़ जाएंगे. सच कहूं, लूसी, यह करने का विचार मेरे मन में पहली बार नहीं आया है. ये लोग अपने पैगंबर से जितना डरते हैं, उतना मैं किसी भी आदमी से नहीं डर सकता. मैं एक आजाद खयालों वाला अमरीकन हूं और यह सब मेरे लिए नया है. शायद मैं नई बातों को सीखने के लिए बूढ़ा हो चुका हूं.”

“पर वे हमें यहां से नहीं जाने देंगे,” बेटी ने विरोधकिया.

“जेफरसन के आने का इंतजार करो. हम ऐसा कर सकेंगे. इस बीच, बेटी तुम परेशान मत हो और न ही अपनी आंखों में आंसू आने देना, नहीं तो वह तुम्हारी यह हालत देख कर मुझ से सवाल करेगा. डरने की कोई बात नहीं है और कोई खतरा भी नहीं है.”

जॉन फेरियर ने दिलासा देने के ये शब्द बड़े विश्वास के साथ बोले थे, पर वह यह गौर कर गई कि उस रात उस के पिता कुछ ज्यादा ही ध्यान से दरवाजों की चटखनी बंद कर रहे हैं और उन्होंने बड़े ध्यान से अपनी जंग लगी शॉटगन को साफ कर के लोड किया, जो उन के बेडरूम की दीवार पर टंगी थी.

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