Ravi KUMAR

कैसी हो तुम

जबसे जाना जितना जाना, बुन रहा बस उसका ताना बाना नाम सी स्वर्णिम,कर्म स्वरूपा अंखियां जीवन ज्योत जगाई अधरों पर...

सहमी सी

डरी हुई सहमी सीप्यारी सी भोली सीदेखती चिहुँक कर चहुओर धड़कन बढ़ी सांसे अटकीलगाए आस पुरजोरएक स्पर्श प्रेम का पाकरउड़ चली...

समझ

समझ कर भी नासमझी का फ़साना क्यूँ।अपने सी लगती फिर भी बेगाना क्यूँ।नासमझी का यूँ हर रोज नया बहाना क्यूँ।हर...

सौंदर्य

जादूगरी प्रशाधनो कीउचित अनुचित संसाधनों कीकुछ सुंदर बिंदिया सजानापायल की छम छम बजानाफॉसिल की घड़ियां सजानागेस की महक जगानाजारा के...

पगली

उस पगली की बातों में खोना।उसका पास होकर भी न होना।ख्याब उसके हरपल सँजोना।उसकी आगोश में आँखे भिगोना। आश भरकर...

वो अघोरी

मैं उसे देखकर नजरअंदाज कर दिया करता था।तब मुझे इनके ढकोसले पन और कर्महीनता पर बहुत ही क्रोध आता था।गन्दगी...

प्रवी

प्रवी रोज की तरह आज स्कूल से 1:00 बजे घर पहुँची।स्कूल का बैग उतारकर बगल में रख दिया और मेरे...

त्याग

बहुत पुरानी बात है।दादाजी और गांव के कुछ लोगों से सुना था।हमारे गांव में गोमती नदी के किनारे एक बहुत...